About Us

SAMEECHEEN, a non-commercial Peer Reviewed Research Journal, is an open platform in the field of literature, society, culture and politics. Its Publication was started in the year 1988 as tri-monthly / half yearly journal edited by noted Hindi fiction writer and critic Dr. Devesh Thakur. At present Dr. Satish Pandey is looking after as an editor.
SAMEECHEEN is an attempt to highlight the works and trends in contemporary literature, culture, politics and Society.
SAMEECHEEN also provides a window for those writers who have made a significant contribution, but who on account of mean political and literary groupism, have been ignored and side lined by those, who have managed to rule the roost.
Also SAMEECHEEN makes an attempt, to bring before the readers, the works of those aspiring writers, which reach creative potential, who have been deprived of the credit they are deserving of, on account of inadequate Publication opportunities.


‘समीचीन' साहित्य, समाज, संस्कृति और राजनीति के खुले मंच की एक अव्यावसायिक एवं विद्वत परीक्षक-मण्डल द्वारा अनुमोदित सहित्यिक शोध-पत्रिका है, जिसका प्रकाशन प्रसिद्ध कथाकार-समीक्षक डॉ. देवेश ठाकुर के संपादन में सन 1988 से त्रैमासिक या अर्धवार्षिक रूप में लगातार होता आ रहा है। वर्तमान में इसके संपादन का दायित्व डॉ. सतीश पांडेय संभाल रहे हैं।
'समीचीन' एक साझा मंच है, जिसका उद्देश्य समसामयिक साहित्य, संस्कृति, समाज और राजनीति के क्षेत्र में किए गए महत्वपूर्ण रचनात्मक प्रयासों एवं प्रवृत्तियों को रेखांकित करना रहा है।
'समीचीन' उन संकल्पित एवं समर्थ रचनाकारों को भी अवसर प्रदान करता रहा है, जो अपनी महत्वपूर्ण रचनाएँ देने के बावजूद साहित्य के क्षेत्र में व्याप्त गुटबाजी एवं संकीर्ण राजनीति के कारण उपेक्षा का शिकार बने रहे और नामवर मठाधीशों द्वारा हाशिए पर डाल दिए गए।
साथ ही, समीचीन का प्रयास पाठकों के सम्मुख उन संभावनाशील रचनाकारों-समीक्षकों की रचनाओं को प्रकाश में लाने का भी रहा है, जो अपनी रचनात्मक प्रतिभा के बावजूद अपेक्षित मात्रा में प्रकाशित होने का अवसर न मिल पाने के कारण अपनी रचनात्मक चमक बिखेर पाने में असमर्थ रहे हैं।